फैक्ट चेक: एपस्टीन फाइलों के नाम पर वायरल हुईं फर्जी तस्वीरें, AI के जरिए 2 करोड़ से ज्यादा लोग हुए गुमराह
जेफरी एपस्टीन केस से जुड़े दस्तावेज़ सार्वजनिक होने के साथ ही सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ और 'डीपफेक' तस्वीरों की बाढ़ आ गई है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनी फर्जी तस्वीरों के जरिए न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी और पूर्व गवर्नर निक्की हेली जैसी हस्तियों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
हैरानी की बात यह है कि इन फर्जी दावों को अकेले X (ट्विटर) पर 2.1 करोड़ (21.2 मिलियन) से ज्यादा बार देखा जा चुका है।
AI और अदृश्य वॉटरमार्क का खेल
मीडिया क्रेडिबिलिटी पर नज़र रखने वाली संस्था न्यूज़गार्ड (NewsGuard) ने ऐसी सात प्रमुख तस्वीरों की पहचान की है जो पूरी तरह से फर्जी हैं। जांच में सामने आया कि:
ज़ोहरान ममदानी की तस्वीरें: सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी तस्वीरें वायरल की गईं जिनमें ज़ोहरान को बचपन में एपस्टीन के साथ दिखाया गया है।
कैसे पकड़ा गया झूठ: न्यूज़गार्ड की जांच और गूगल जेमिनी के विश्लेषण में इन तस्वीरों में ‘सिंथआईडी’ (SynthID) नाम का एक अदृश्य वॉटरमार्क मिला। यह वॉटरमार्क गूगल के AI इमेज जनरेटर द्वारा बनाया जाता है, जिससे यह साबित हो गया कि ये तस्वीरें असली नहीं बल्कि कंप्यूटर द्वारा बनाई गई हैं।
निक्की हेली और फर्जी ईमेल का दावा
सिर्फ तस्वीरें ही नहीं, बल्कि छेड़छाड़ किए गए दस्तावेज़ भी साझा किए जा रहे हैं। एक वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि निक्की हेली ने एपस्टीन को ईमेल लिखकर बच्चों के साथ फ्लाइट का इंतज़ाम करने को कहा था।
सच्चाई: न्यूज़गार्ड के अनुसार, अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी की गई किसी भी फाइल में ऐसा कोई ईमेल मौजूद नहीं है। निक्की हेली और एपस्टीन के बीच किसी भी तरह के संपर्क का कोई प्रमाण अब तक नहीं मिला है।
क्यों खतरनाक है यह ट्रेंड?
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली भूमिका AI चैटबॉट्स और प्रभावशाली सोशल मीडिया यूज़र्स की रही है।
ग्रोक (Grok) की चूक: दक्षिणपंथी विचारक एलेक्स जोन्स ने जब एक फर्जी तस्वीर पोस्ट की, तो एलन मस्क के AI 'ग्रोक' ने उसे असली बता दिया। इसने भ्रम को और गहरा कर दिया।
राजनीतिक हस्तियों को निशाना: हालांकि बिल क्लिंटन और डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेताओं के नाम वास्तविक दस्तावेज़ों में अलग-अलग संदर्भों में आए हैं, लेकिन अब उन लोगों को भी घसीटा जा रहा है जिनका इस केस से कोई लेना-देना नहीं है।
"न्यूज़गार्ड के एक सर्वे के मुताबिक, अमेरिका में लगभग 50% लोग किसी न किसी बड़ी खबर से जुड़े कम से कम एक झूठे दावे पर भरोसा कर लेते हैं।"
सावधानी ही बचाव है
एपस्टीन मामले की जांच अभी जारी है और दस्तावेज़ों की पड़ताल की जा रही है। ऐसे में किसी भी सनसनीखेज तस्वीर या ईमेल के स्क्रीनशॉट पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि करना ज़रूरी है। डिजिटल युग में 'सिंथेटिक मीडिया' का इस्तेमाल अब केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि चरित्र हनन के लिए भी किया जा रहा है।

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